नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 78 of 106
प्रेम खेल सबसों कठिन, खेलत कोउ सुजान।
नारायण बिन प्रेम के, कहा प्रेम पहचान॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (151)
प्यार का खेल हमेशा कठिन होता है, अच्छे से खेला जाता है। नारायण प्रेम बिन, कहिये प्रेम पहचान.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (151)