नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 79 of 106

जिननें प्रेम प्यालो पियो, झूमत तिनके नैन। नारायण वा रूप मद, छके रहैं दिन रैन॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (152) जो लोग जीते हैं वे पुआल से नहीं, बल्कि प्रेम के प्याले से पीते हैं। नारायण ऐसा पागल है, दिन बरसात के रहते हैं.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (152)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै