नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 82 of 106

देह गेह की सुधि नहीं, टूटि गई जग प्रीत। नारायण गावत फिरैं, प्रेम भरे रसगीत॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (159) देह की याद न रही, संसार से मोह टूट गया। नारायण गावत फिरैन, प्रेम भरे रसगीत.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (159)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै