नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 88 of 106

कह्यो चहै कछु कहत कछु, नयन नीर सुरभंग। नारायण बौरा भयो, लग्यो प्रेमको रंग॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (164) चाहो तो कुछ कहो, बिन आँखों के कुछ कहो। नारायण रूठे, प्रेम रूठे.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (164)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै