नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 89 of 106
कबूँ हँसै रोवै कबूँ, नाचत करि गुण गान।
नारायण सुधि तन नहीं, लग्यो प्रेम को बान॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (165)
जब कोई हँसता और रोता है, तो कोई नाचता और गाता है। नारायण तन का मन नहीं, प्रेम वर्जित है.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (165)