नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 90 of 106
ब्रह्मादिक के भोग सुख, विष सम लागत ताहि।
नारायण ब्रजचन्दकी, लगन लगी है जाहि॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (169)
सांसारिक सुख विष के समान प्रतीत होते हैं। नारायण ब्रजचांदकी, लगन लगी है जाही.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (169)