नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 91 of 106
नारायण हरि प्रीति में, जाको तन मन चूर।
ताहि न ममता और सों, निकट रहौ वा दूर॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (170)
नारायण हरि प्रीति पुरुष, तन मन से जावो। बेटा कोई मोह नहीं, पास हो या दूर.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (170)