नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 93 of 106

जाके मन में बसि रही, मोहन की मुसिक्यान। नारायण ताके हिये, और न लागत ज्ञान॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (172) मोहन का संगीत जेक के दिमाग में लगातार बना रहा. नारायण तक ही, और एन लगत ज्ञान.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (172)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै