नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 94 of 106

जो घायल हरि दृगन के, परे प्रेम के खेत। नारायण सुनि श्याम गुण, एक संग रो देत॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (173) घायल हरे ड्रैगन से परे प्रेम के क्षेत्र। नारायण सुन श्याम गुण, मिलकर रोते हैं.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (173)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै