नारायण दुख सुख उभै
Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी
Verse 95 of 106
नारायण जाको हियो, बिंध्यो, श्याम दृग बान।
जगके भावें जीवतो, है वह मृतक समान॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (174)
नारायण बने बिन्धो, श्याम बने दिग। संसार की इमारतें जीवित हैं, मृत समान हैं.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (174)