नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 96 of 106

सुख सम्पति धन धामकी, ताहि न मन में आस। नारायण जाके हिये, निशिदिन प्रेम प्रकाश॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (175) सुख, धन, संपत्ति, खतरा, ताहि एन मन पुरुष अस। आये हैं नारायण, निशिदिन प्रेम प्रकाश.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (175)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै