नारायण दुख सुख उभै

Anurag Ras — श्री नारायण स्वामी

Verse 98 of 106

नारायण तब जानिये, लगन लगी या काल। जित तित में दृष्टी परै, दीखैं मोहनलाल॥ - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (177) नारायण, फिर जानें समर्पण शुरू हुआ या कल। मेरे मन में मोहनलाल सबको दिखाई देता है.. - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (177)
नारायण दुख सुख उभैनारायण दुख सुख उभै