तिनुका ज्यौं बयार के बस

Ashtadash Pada —

Verse 16 of 16

(राग आसावरी) तिनुका ज्यौं बयार के बस। ज्यौं चाहै त्यौं उड़ाय लै डारे अपने रस॥ [1] ब्रह्म लोक सिवलोक और लोक अस। कहिं श्री हरिदास विचार देखौ विना बिहारी नाहिं जस॥ [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, अष्टादश पद (8) (राग असावरी) तिनुका ज्यूं बयार के बास। जैसी तुम्हारी इच्छा, तुम उठो और अपने जुनून से डरो। [1] ब्रह्म लोक, शिव लोक और लोक अस। कहिन श्री हरिदास विचार देखों विना बिहारी नहीं जस.. [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, अष्टादश पाद (8)
हरि के नाम कों आलस कत करत है रे