जगत प्रीति करि देखी
Ashtadash Pada —
Verse 8 of 16
(राग कल्याण एवं कान्हरौ)
झूठी बात सांची करि दिखावत हौ हरि नागर। [1]
निसि दिन बुनत उधेरत जात प्रपंच कौ सागर॥ [2]
ठाट बनाय धरयौ मिहरी कौ है पुरुषतें आगर। [3]
सुनि हरिदास यहैं जिय जानों सपनें कौ सौ जागर॥ [4]
- श्री स्वामी हरिदास, अष्टादश पद (14)
(राग कल्याण और कान्हरौ) हरि नगर एक नकली शो है। [1] निसि दिन बुनत उधेरत जात प्रपंच कौ सागर.. [2] वह बनय धरयौ मिहारी कौ है पुरुषतेन आगर। [3] सुनो हरिदास, यहीं रहो, कोई स्वप्न नहीं देखता, कोई जागता नहीं.. [4] - श्री स्वामी हरिदास, अष्टादश पाद (14)