प्रेम-समुद्र रूप-रस गहरे, कैसैं लागैं घाट
Ashtadash Pada —
Verse 7 of 16
(राग कल्यान)
जौलौं जीवै तौलौं हरि भज रे मन और बात सब बादि। [1]
द्यौस चार के हला-भला में कहा लेइगौ लादि? [2]
माया-मद, गुन-मद, जोवन-मद भूल्यौ नगर विवादि। [3]
कहिं श्रीहरिदास लोभ चरपट भयौ, काहे की लगै फ़िरादि॥ [4]
- श्री स्वामी हरिदास जी, अष्टादश पद (17)
(राग कल्याण) जौलौं जिवै तौलौं हरि भज रे मन और बट सब बदीरी। [1] डिओस चार के हला-जेवलिन में लिगाउ ने कहाँ लड़ाई की? [2] माया-मद, गुण-मद, जोवना-मद भुल्यौ नगर विवाद। [3] श्री हरिदास जी कहाँ हैं, वे लोभ से क्यों डरें, वे क्यों सहायता माँगें.. [4] - श्री स्वामी हरिदास जी, अष्टादश पाद (17)