वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 103 of 268
शिव-विधि-उद्धव सबनि कैं, यह आसा रहै चित्त।
गुल्म लता ह्वै सिर धरैं, वृंदावन रज नित्त॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (44)
शिव-विधि-उद्धव सबनि कैं, यः अस रहा चित्त। गुल्म लता ह्वै सिर धरैं, वृन्दावन राज नित्ता.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (44)