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Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 104 of 268

अलबेली सुकुमारी नैननिं के आगैं रहै, जब लगी प्रीतम के प्राण रहें तन में॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, श्रिंगार शत 1 (45) अलबेली सुकुमारी नन्निन फिर है, जब प्रियतम के प्राण उसके शरीर में हैं.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, शृंगार शत 1 (45)
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