वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 105 of 268

चतुरानन देख्यौ कछुक, वृंदाविपिन प्रभाव। द्रुम-द्रुम प्रति अरु लता प्रति, औरे बन्यौ बनाव॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (45) चतुरानन देख्यौ कच्छुक, वृंदाविपिन प्रभाव। ढोल नगारे अरु लता प्रति, औरे बनायौ बनाव.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (45)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिजब चितई कजरारे नैननि