जब चितई कजरारे नैननि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 106 of 268

(राग मारू) जब चितई कजरारे नैननि। बिवस भये मनमोहन घेरे, चहूँ ओर तें प्रेम के मैंननि॥ [1] मुसिकनि मंद रहे चितवत ही, बस किये लाल मधुर मृदु बैंननि। 'हित ध्रुव’ रज बंदत अति प्यार सौं , धरति चरन प्यारी जिहि गैंननि॥ [2] - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (45) (राग मारू) जब चितै कजरारे नैनानी। बिवस डरती है घिरे हुए मनमोहन से, करूँ उससे प्यार या दस प्यार का दीवाना.. [1] चिंता में संगीतनी मंद-मंद रह गई, बस लाल, मीठी और मुलायम हो गई। 'हित ध्रुव' राज बंदत अति प्यार सौं, धरती चरण प्यारी जिहि गनानी.. [2] - श्री हित ध्रुव दास, बयालिस लीला, पद्यावली (45)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिवृन्दाविपिन प्रणाम करि