वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 107 of 268
प्रेम रंग सौं रँगे जे, नहिं आनत उर आन।
अद्भुत जुगल विहार रस, तेई करिहैं पान॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (45)
प्रेम रंग सौं रंगे जे, नहिं अनात उर अन। अद्भुत जुगल विहार रास, टाई करिहैं पान.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, ख्याल हुल्लास (45)