वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 108 of 268
आप सहित सब चतुर्भुज, सब ठाँ रह्यौ निहारि।
प्रभुता अपनी भूलि गयौ, तन मन के रह्यौ हारि॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (46)
एपी समेत सभी चतुर्भुज, सब मौन निहारी। तुम भूल गये अपनी प्रभुता हरि, तन-मन में बसो.. - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (46)