लाल लाड़िली प्रेम तें, सरस सखिनु कौ प्रेम।
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 109 of 268
लाल लाड़िली प्रेम तें, सरस सखिनु कौ प्रेम।
अटकी हैं निज प्रीति रस, परसत तिनहिं न नेम॥
- श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, प्रेम लता (46)
लाल नारी का प्रेम तब, सरस सखिनु का प्रेम। अतकी है निज प्रीति रस, परसत तिनहिं न नेम.. - श्री ध्रुवदास, ब्यालिस लीला, प्रेम लता (46)