वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 110 of 268
चढ़ि कै मैन तुरंग पर, चलिबौ पावक माँहि।
प्रेम-पंथ ऐसौ कठिन, सब कोउ निबहत नाहिं॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (47)
क्या मैं नदी पार कर सकता हूँ? प्रेम-पंथ अइसौ कथिन, सब कोउ निबाहत नाहिं.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, ख्याल हुल्लास (47)