वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 11 of 268
मन गज तजि कै विषै मग, चलहु भजन रस माहि।
श्री राधावल्लभ लाल बिनु, तेरौ कोऊ नाहिं॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (6)
मेरा हृदय आनंद से भर गया है, मैं भजन रस गाने जा रहा हूं। श्री राधावल्लभ लाल बिनु, तेरौ कू नाहिं.. - श्री ध्रुवदास जी, बयालिस लीला, मन शिक्षा लीला (6)