वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 111 of 268

लोक चतुर्दश ठकुरई, सम्पति सकल समेत। सब तजि बसी वृन्दाविपिन, रसिकनि कौ रस खेत॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (47) लोक चतुर्दश ठकुराई, संपत्ति सकल सुमेत। सब तजि बसि वृन्दाविपिन, रसिकनि कौ रस खेत.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (47)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिवृन्दाविपिन प्रणाम करि