वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 13 of 268

रे मन अरु सब छाँडि कै, जो अटकै इक ठौर। वृन्दावन घन कुंज में, जहाँ रसिक शिरमौर॥ - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (7) हे मन और सभी श्लोक, जो एक ही स्थान पर अटके हुए हैं। वृन्दावन घन कुंज में, जहाँ रसिक शिरमौर.. - श्री ध्रुवदास जी, बयालिस लीला, मन शिक्षा लीला (7)
राजति कुँवरि परम सुकुवाँरी(कवित्त)