(कवित्त)
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 14 of 268
(कवित्त)
श्री राधिकावल्लभ प्यारी फुलवारी माँझ ठाड़ी,
फूलकारी सारी तन सोभित बनाव की। [1]
लोचन विशाल बाँके अनियारे कजरारे,
प्रीतम के प्रान हरै हेरनि सुभाव की॥ [2]
चूरी मखतूल नीलमनिन की कर बनी,
बेसरि सुदेस उर अँगिया कटाव की। [3]
कुंदन की दुलरी अरु मोतिन के हार हियैं
'हित ध्रुव' चारु चौकी लसत जराव की॥ [4]
- श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, श्रृंगार शत 1 (06)
(कविता) श्रीराधिका वल्लभ प्यारी फुलवारी मंज ठाढ़ी, फुलकारी रची सकल तन की शोभा। [1]. [3] कुन्दन का प्रेम और मोतिन का रोम-रोम 'हित ध्रुव' चारु चौकी लसत जराव की.. [4] - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, शृंगार शत 1 (06)