वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 132 of 268

भजन रस मई विपिन धर, समुझि बसे जो कोई। प्रेम बीज तिहिं खेत तें, तब ही अंकुर होइ॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (59) भजन रस माई विपीन धार, समुझि बसे जो कोई। प्रेम का बीज तीन क्षेत्रों में उगता है, तभी उसका अंकुरण होता है.. - श्री ध्रुवदास, ब्यालास लीला, वृन्दावन शत लीला (59)
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