देखौ अद्भुत प्रीति की चालहि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 134 of 268

(राग नट) देखौ अद्भुत प्रीति की चालहि। सुनि सखी पियहि प्यार सौं प्यारी, राखति ज्यौं उर मालहि॥[1] ह्वै-ह्वै जात विवस मनमोहन, निरखि नैंन नव-बालहि। 'हित ध्रुव' सरस मधुर अधरामृत, प्याइ जिवावति लालहि॥[2] - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (60) (राग नाता) देखो प्रेम की अद्भुत युक्ति। सुनि सखी पियाहि प्यार सौं प्यारी, राखति ज्यों उर मलाहि..[1] ह्वै-ह्वै जात विवस मनमोहन, निरखि नैनन नवा-बलाही। 'हित ध्रुव' मधुर मधुर अमृत पै जीववती ललहि..[2] - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, पद्यावली (60)
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