वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 135 of 268

उलटौ पंथ है प्रेम कौ, तहाँ रह्यौ मन हारि। जसहू सुनि लागत बुरौ, मीठी लागति गारि॥ - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (60) उलाताउ संप्रदाय वह है जो प्यार करता है, वहीं रहता है और हार नहीं मानता। जशु सुनि लगत बुरौ, मीठी लगत गारी.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, ख्याल हुल्लास (60)
देखौ अद्भुत प्रीति की चालहिवृन्दाविपिन प्रणाम करि