वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 139 of 268

कहँ तू कहँ वृन्दाविपिन, आनि बन्यौ भल बान। यह बात जिय समुझि कै, अपनौ छाँड़ सयान॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (62) तुम कहाँ हो, वृंदाविपिन, तुम कहाँ हो? यह बात मेरी समझ में आ गई है, मुझे अपने दोहे याद आ गए हैं.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (62)
आज सखि निरख रूप भरि नैनवृन्दाविपिन प्रणाम करि