वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 15 of 268
सोउ कृपा अति सुगम नहिं, ताकौ कौन उपाव।
चरन सरन हरिवंश की, सहज हिं बन्यौ बनाव॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (7)
हंड्रेड ग्रेसेज़ बहुत आसान नहीं हैं, आप उन्हें समझते क्यों नहीं? हरिवंश के चरणों में सारण भोले को नीच बनाते रहते हैं... - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (7)