प्रिया मुख निरखत नवल

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 141 of 268

(राग केदारौ) प्रिया मुख निरखत नवल किसोर। मनहुँ सहज राकेस अमी प्रति, चितवत चकित चकोर॥ [1] छिन - छिन नई - नई छबि उपजत, पल-पल में रूचि और। 'हित ध्रुव' बसौ कुँवर उर ऐसै , परम रसिक सिरमौर॥ [2] - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (43) (राग केदारौ) प्रिय मुख निरखत नवल किशोर। मनहुं सहज राके अमी प्रति, चितवत चकत चकोर.. [1] छिन-छिन नै-नै छवि उपजत, पल-पल-पल-पल-पल-रचुचि-और। 'हित ध्रुव' बसौ कुँवर उर ऐसाई, परम रसिक सिरमौर.. [2] - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, पद्यावली (43)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिवृन्दाविपिन प्रणाम करि