वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 143 of 268

नहिं सो माता पिता नहिं, मित्र पुत्र कोउ नाहिं। इनमें जो अन्तर करै, बसत वृन्दावन माँहि॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (65) नहीं, कोई माता-पिता नहीं, कोई मित्र नहीं, कोई बेटा नहीं। वृन्दावन मन्ही में दिया जाने वाला पुरस्कार.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (65)
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