वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 144 of 268

नाते जेते जगत के, ते सब मिथ्या मान। सत्य नित्य आनंद मय, वृन्दावन पहिचान॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (66) इस दुनिया से संबंधित, ये सभी झूठे दिमाग हैं। सत्य सदा आनंदमय हो, वृन्दावन पहचान.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (66)
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