वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 145 of 268
बसिके वृन्दाविपिन में, ऐसी मन में राख।
प्राण तजौ बन ना तजौ, कहौ बात कोऊ लाख॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (67)
बस वृंदाद्वीपी में ही मन रखो, ऐसे ही मन रखो। प्राण तजौ बन न तजौ, कहौ बात कुओ लाख.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (67)