वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 146 of 268
चलत फिरत सुनियत यहै, (श्री) राधाबलभलाल।
ऐसे वृन्दाविपिन में, बसत रहौ सब काल॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (68)
चलते-चलते सुनियत यहीं हैं, (श्री) राधाबल्भलाल। ऐसे वृन्दाविपिन मन, सब कल जियो। - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (68)