गरजनि घन अरु दामिनी
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 147 of 268
(राग मलार)
गरजनि घन अरु दामिनी, चातीक पिक सुक बोलति मोरनि।
स्याम घटा काजर हूँ तें कारी, उमड़ि-उमड़ि आई चहुँ ओरनि॥ [1]
नान्हि-नान्हि बूँदनी बरषनि लाग्यो, तैसियै रोचक पवन झकोरनि।
‘हित ध्रुव’ प्यारी प्यार सौं झूलत, पियहि झुलावति नैंननि कोरनि॥ [2]
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (68)
(राग मलारा) गरजनी घन अरु दामिनी, चटिक पिक सुक बोलति मोरानी। स्याम घाट काजर हुण तेन कारी, उमादि-उमादि ऐ चहुं ओराणी.. [1] छोटे-छोटे बंडलों में बारिश होने लगी, ऐसी दिलचस्प हवा झकोरानी। 'हित ध्रुव' प्यारी प्यार सौं झूलत, पियाहि झूलावती नैनानी कुरानी.. [2] - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, पद्यावली (68)