वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 149 of 268

सुरपति-पसुपति-प्रजापति, रहे भूल तेहि ठौर। वृंदावन वैभव कहौ, कौन जानिहै और॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (73) सुरपति-पशुपति-प्रजापति, इस विस्मृत स्थान में निवास करें। वृन्दावन की महिमा क्या है, अधिक कौन जानता है.. - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (73)
अतिहिं लालची लाल पियवृन्दाविपिन प्रणाम करि