वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 150 of 268

बसिवौ वृन्दाविपिन कौ, यह मन में धरी लेहु। कीजै ऐसौ नेम दृढ़, या रज में परै देह॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (69) बसिवौ वृन्दाविपिं कौ, यह ध्यान रखूँगा। किजै ऐसो नेम द्रधा, या राज्य में एक विदेशी संस्था.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (69)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिगरजनि घन अरु दामिनी