अतिहिं लालची लाल पिय

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 16 of 268

तीन लोक कौ राज सुख, देखौ तुला चढ़ाई। निमिष प्रेम सुख गरुव अति, तेही आगैं घटि जाइ॥ - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, अनुराग लता (7) तीनों लोक का राजसी सुख किसे मिलता है? देखिये, बैलेंस बढ़ता जा रहा है. निमिष प्रेम सुख गरुव अति, तेहि फिर घटी जय.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, अनुराग लता (7)
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