वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 153 of 268

खण्ड-खण्ड ह्वै जाइ तन, अंग अंग सत टूक। वृन्दावन नहिं छाँड़ियै, छाँड़िबौ है बड़ि चूक॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (70) हर अंग धन्य है, हर अंग धन्य है। वृन्दावन छंदई नहीं, छंदइबौ ब्रदै चुक.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (70)
अतिहिं लालची लाल पियहिंडोरे झूलत री सुरंग चूनरी पहिरें