हिंडोरे झूलत री सुरंग चूनरी पहिरें
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 154 of 268
(राग मलार)
स्यामा जू के चरननि की बलिहारी।
जे हैं बसत किसोर लाल के, प्राँननि मध्य सदा री॥ [1]
विहरत कुसुम पराग लगत जब, पीत वसन लै झारत।
लुठत मयूर चंद्रिका तिन पर, अद्भुत छबिहि निहारत॥ [2]
जावक चित्र बनाइ सँवारत, करनि सफल तब मानत।
'हित ध्रुव' ते दुर्लभ सबहिनु तें, रसिक मरम पै जानत॥ [3]
- श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, पद्यावली (72)
(राग मलारा) श्यामा जू के चरणों में बलिदान। यह किशोर लाल का वसंत है, सदैव प्रेम के बीच में.. [1] कुसुम पराग जब तैरता है, पिता वसंत में होता है। चंद्रमा पर एक सुंदर मोर, एक अद्भुत छवि को निहारता हुआ.. [2] यह तभी सफल माना जाएगा जब बाहरी छवि उत्तम हो। 'हित ध्रुव' ते दुर्लभ सुभीनु तेन, रसिक मरम पै जंत.. [3] - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, पद्यावली (72)