वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 155 of 268

वृंदावन के गुनन सुनि, हित सों रज में लोट। जेहि सुख कौ पूजत नहीं, मुक्ति आदि सत कोट॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (72) वृन्दावन की स्तुति सुनो, अपने पुत्र को मार डालो और राज्य में लौट जाओ। जहाँ न सुख, न भजन, न मोक्ष आदि सत कोट.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (72)
हिंडोरे झूलत री सुरंग चूनरी पहिरेंवृन्दाविपिन प्रणाम करि