वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 156 of 268

यद्यपि राजत अवनि पर, सबते ऊँचौ आहि। ताकी सम कहिये कहा, श्रीपति बंदत ताहि॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (74) हालाँकि, चांदी के स्तर पर सब कुछ अज्ञात है। इसीलिए कहा गया है, श्रीपति बंधत ताहि.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (74)
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