वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 157 of 268
वृंदावन वृंदाविपिन, वृंदा कानन ऐन।
छिन-छिन रसना रटौ कर, वृंदावन सुख दैन॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (75)
वृन्दावन वृन्दाविपिन है, वृन्दा कानन है। एक-एक रसना का स्मरण करो, वृन्दावन सुखमय है.. - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (75)