वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 158 of 268

सब तजि जुगल-किसोर भजि, जौ चाहत विश्राम। 'हित ध्रुव' मन बच हेत सौं, सेवहु स्यामा-स्याम॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, बृहद वामन पुराण की भाषा (76) सब कुछ ताजा है, जुगला-किशोर भाजी, जौ विश्राम चाहता है। 'हिट ध्रुव' मन बच हे सौं, सेवहु स्याम-स्याम.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, बृहद वामन पुराण की भाषा (76)
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