वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 17 of 268
यह रस नित्य-विहार बिनु, सुन्यौ न देख्यौ नैन।
एक प्रीति वय रूप दोउ, बिलसत इक रस मैन॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (7)
यः रस नित्य-विहार बिनु, सुनायु न देख्यौ नैन। एक प्रेम और एक रूप, एक प्रेम और एक रस दो.. - श्री हित ध्रुवदास, बयालिस लीला, ख्याल हुल्लास (7)