वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 160 of 268
वृन्दावन वृन्दा कहत, दुरित वृन्द दुरि जाहिं।
नेह बेलि रस भजन की, तब उपजै हिय माहिं॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (77)
वृन्दावन वृन्दा कहती हैं, दुरित वृन्द दुरित जाहि। नेह बेली रस भजन, तब उपजै ही माही.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (77)