वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 161 of 268
वृन्दावन श्रवनन सुनहि, वृन्दावन को गान।
मन वच कै अति हेत सौं, वृन्दावन उर आन॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (78)
वृन्दावन श्रवणम् सुनहि, वृन्दावन को गाओ। मन वाच कै अति हेत सौं, वृन्दावन उर अन.. - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (78)